




यह मिले मुझे एक फेक्ट्री में. कमाल है न?
मैंने ऐसी बहुत फेक्ट्रियां देखी हैं जहाँ सांस लेना भी मुश्किल होता है, और एक यह फेक्ट्री है जो केमिकल्स बनाती है पर वहां पर गुलाब भी उगाती है. साफ़-सुथरी फेक्ट्री, मन प्रसन्न हो जाता है सफाई देख कर.
मेरा यह मानना है कि साफ़-सफाई इंसान के मन में होती है. जब तक इंसान अन्दर से साफ़ नहीं होगा , बाहर की सफाई उस के किये कोई महत्त्व नहीं रखती. एक बार जिस ने गंदगी वर्दाश्त कर ली वह सफाई से हमेशा के लिए वंचित हो गया.
0 comments:
Post a Comment